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अब कोर्ट की अवमानना होने पर कोई व्यक्ति दाखिल नहीं कर सकता याचिका

अदालत के किसी आदेश का जानबूझकर उल्लंघन हो रहा हो या अदालत पर कोई अपमानजनक हमले कर रहा हो, तो उससे आहत होकर कोई निजी व्यक्ति इस अपमान के लिए उस व्यक्ति के खिलाफ अवमानना याचिका दायर नहीं कर सकता। यहां तक कि जिला अदालतों को भी कानून में ये कार्यवाही करने की इजाजत नहीं है।

निजी व्यक्ति अदालत को अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए देश के शीर्षस्थ विधि अधिकारी (अटॉर्नी जनरल) की संस्तुति चाहिए। ये संस्तुति सुप्रीम कोर्ट के मामले में की जाती है, जबकि हाईकोर्ट में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए राज्य के महाधिवक्ता ( एडवोकेट जनरल) की सिफरिश चाहिए। यही वजह है कि मजाकिए कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना की कारवाही शुरू करने के लिए वकीलों ने अटॉर्नी जनरल से सिफारिश हासिल की है।

News source ~ Live Hindustan