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बिहार में जब भी विकास की बात होगी, रामविलास पासवान से चर्चा की शुरुआत होगी, क्यों?

रामविलास पासवान का गुरुवार की शाम निधान हो गया था. वो 74 साल के थे.(फाइल फोटो)बिहार की राजनीति में पिछले चार दशकों के मज़बूत स्तंभ रहेकी अंत्येष्टि शनिवार (10 अक्टूबर) की शाम पटना के दीघा इलाक़े में स्थित जनार्दन घाट पर कर दी गई. लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बाद पासवान दूसरे ऐसे नेता हैं जिन्हें अंतिम संस्कार के वक्त मिलिटरी ऑनर दिया गया. उनके निधन के बाद लोग उनकी सहानुभूति का राजनीतिक असर देखने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनके बेटे और राजनीतिक उत्तराधिकारी चिराग़ पासवान ने एनडीए के मुख्य मंत्री पद का चेहरा नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ बग़ावती सुर अख़्तियार कर रखा है.हालांकि, खुद रामविलास पासवान ने भी नीतीश कुमार को अपने जीवन में लगातार तीन चुनावों ( 2005 (नवम्बर), 2010 और 2015) में रोकने की कोशिश की थी लेकिन हर बार नीतीश विजयी होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए. इस बार चिराग पासवान भी उसी बग़ावती तेवर में नीतीश को चुनौती दे रहे हैं. वो इसमें क़ामयाब हो पाएंगे या नहीं? इसका पता तो 10 नवंबर को ही चल पाएगा, जब ईवीएम नतीजे बताएंगे.लेकिन राज्य की राजनीति में जब भी विकास की बात आएगी तो निश्चित रूप से रामविलास पासवान का नाम सबसे पहले लिया जाएगा क्योंकि बिहार में आज जो भी परियोजनाएं और काम पूरे हए हैं या चल रहे हैं.

News source ~ NDTV